जिला स्तरीय तंबाकू नियंत्रण समिति की बैठक संपन्न

 भोपाल जिले में  तम्बाकू नियंत्रण कानून (कोटपा) की धारा 4, 5, 6 एवं 7 को प्रभावी रूप से लागू कर 6 माह में कोटपा सम्मत जिला बनाया जाएगा।
    भारत सरकार ने तम्बाकू आपदा से लोगों को बचाने के लिए तम्बाकू नियंत्रण कानून कोटपा-2003 बनाया है। इस कानून की धारा 4 के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है और अगर कोई सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता है तो उसे 200. रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। धारा 5 के अनुसार किसी भी तम्बाकू उत्पाद का विज्ञापन या प्रायोजन प्रतिबंधित है, धारा 6 अ के अनुसार नाबालिगों को/के द्वारा तम्बाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है, धारा 6 बी अनुसार शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज (300 फिट) के दायरे में तम्बाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है, धारा 7 के अनुसार तम्बाकू उत्पादों के 85 प्रतिशत हिस्से पर चित्रात्मक स्वास्थ्य चेतावनियाँ अनिवार्य है।  उक्त आशय के निर्देश जिला स्तरीय तम्बाकू नियंत्रण समिति की बैठक में  समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर श्री तरूण कुमार पिथोडे़ ने अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि भोपाल जिले में भारतीय तम्बाकू नियंत्रण कानून की धारा 4, 5, 6 एवं 7 को प्रभावी रूप से लागू कर 6 माह में कोट्पा सम्मत जिला बनाया जाएगा और इसके लिए जल्द ही आदेश जारी होंगे। उन्होंने कहा कि 15 दिवस में इस समिति की बैठक फिर से बुलाई जाए, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठन, धर्मगुरू, स्कूल कॉलेज के प्रतिनिधि आदि को बुलाया जाए। उन्होंने प्रशासन की ओर से तम्बाकू नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी भी नामांकित किया। 
    जिला स्तरीय तम्बाकू नियंत्रण समिति की बैठक में  विभिन्न विभागों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया और उन्हें तम्बाकू नियंत्रण और तम्बाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी रूप से क्रियान्वयन के लिए क्या करने की जरूरत है के बारे में बताया गया। मध्यप्रदेश वॉलन्ट्री हेल्थ ऐसोसिएशन के प्रोजेक्ट मैनेजर बकुल शर्मा ने बताया कि तम्बाकू नियत्रंण के लिए विभिन्न विभागों का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि:-  
    जिला स्तरीय तम्बाकू नियंत्रण समिति की त्रैमासिक अंतराल पर नियमित बैठक आयोजित कर तम्बाकू नियंत्रण कानून का परिपालन सुनिश्चित किया जाए।
अवयस्कों को तम्बाकू उत्पाद बेचने पर कड़ी कार्यवाही की जावे। 
    तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रायोजन आदि पर कार्यवाही की जाए और समस्त तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन पूरी तरह से हटाए जाए। 
    शैक्षणिक संस्थानों के 300 फिट के दायरे में तम्बाकू उत्पादों की दुकान हटाई जाए एवं शैक्षणिक संस्थानों के 300 फिट के दायरे में पीली रेखा बनाकर चिन्हित किया जाए। 
    तम्बाकू उत्पाद की दुकानों पर धारा 6अ के अंतर्गत निर्धारित सूचना-पटल अनिवार्य रूप से लगाए जाए। 
    शैक्षणिक संस्थान के मुख्य द्वार पर तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान- इस शैक्षणिक संस्थान के 100 गज (300 फिट) के दायरे में किसी भी प्रकार के तम्बाकू उत्पाद बेचना अपराध है एवं उल्लंघन करने वालों पर 200/- रूपये तक का जुर्माना हो सकता है, का बोर्ड लगवाया जाए। 
    राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों का समन्वय किया जाए। 
प्रतिमाह आयोजित होने वाली पुलिस विभाग की क्राईम रिव्यू मीटिंग में तम्बाकू नियंत्रण कानून के परिपालन की समीक्षा नियमित रूप से की जाए। 
    पंचायत सचिवों के माध्यम से पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी गाँव में तम्बाकू नियंत्रण कानून का पूर्ण रूप से परिपालन करवाया जाए। 
    भारत में 12 से 13 लाख लोगों की मौत का कारण तम्बाकू से होने वाली बीमारियाँ हैं। 
    वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण 2016-17 गेट्स 2 के अनुसार भारत में 39 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 34 प्रतिशत वयस्क तम्बाकू का प्रयोग करते हैं। भारत में 16 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 10 प्रतिशत वयस्क धूम्रपान करते हैं और भारत में 31 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 28 प्रतिशत वयस्क धूम्ररहित तम्बाकू का सेवन करते हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009-10 में 40 प्रतिशत लोग सार्वजनिक स्थानों पर परोक्ष धूम्रपान का शिकार होते थे, वहीं अब यह 2016-17 में घटकर 24 प्रतिशत हो गए हैं। इसका मुख्य कारण है कि विगत कई वर्षों में प्रवेश में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को रोकने के लिए सतत् निगरानी, जागरूकता और दंड किया गया है, जिससे लोगों में परिवर्तन आया है। बैठक में ए.डी.एम. श्री सतीश एस., मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी श्री सुधीर डेहरिया एवं फुड, ड्रग, एन.सी.सी., नगर निगम आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही ए.पी.ओ. संजय शर्मा डी.पी.एच.एन.ओ. राजकुमार चैहान मीडिया प्रभारी प्रणौती विश्वास पवन चैहान आदि उपस्थित थे।

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